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Laxmmi Bomb (Laxmii) Movie Release and Review | Akshay Kumar की फिल्म 'लक्ष्मी Bomb' Ka Review

 लंबे समय के इंतजार के बाद Akshay Kumar की फिल्म 'लक्ष्मी' फाइनली रिलीज हो गई है। इस फिल्म पर Bich में काफी विवाद भी रहा था लेकिन अब इसे ओटीटी Par रिलीज कर दिया गया है। यह फिल्म तमिल Movie 'कंचना' की हिंदी रीमेक है।

 

कोरोना ना होता तो दर्शक 'लक्ष्मी' (पहले लक्ष्मी बम) को मई में ईद पर ही देख चुके होते। मगर, 'आसिफ़' की ईद निकल गयी तो 'लक्ष्मी' दिवाली पर बरसने आ गयी। हॉरर-कॉमेडी फ़िल्म 'लक्ष्मी' ट्रांसजेंडरों को लेकर सोच की संकीर्णता और समाज में उनकी सहज स्वीकार्यता जैसे संवेदनशील मुद्दे को रेखांकित ज़रूर करती है, मगर इन मुद्दों और संदेशों के बीच फ़िल्म की कहानी पूरी तरह डगमगा जाती है। कई जगह कहानी अपनी मूल-भावना का विरोधाभास करती नज़र आती है। 

 

Laxmi bomb

लक्ष्मी, हरियाणा के रेवाड़ी में रहने वाले आसिफ़ (अक्षय कुमार) और रश्मि (कियारा आडवाणी) की कहानी है, जिन्होंने प्रेम-विवाह किया है। आसिफ़ के साथ रश्मि ख़ुश है। उनके साथ आसिफ़ का भतीजा शान भी रहता है, जिसके माता-पिता कुछ वक़्त पहले एक हादसे में मारे गये थे। आसिफ़ टाइल्स और मारबल का बिज़नेस करता है। तर्कसंगत सोच रखने वाले आसिफ़ को भूत-प्रेतों में यक़ीन नहीं है और अंधविश्वास भगाने के लिए एक संस्था भी चलाता है। 

 

फिल्म की कहानी आसिफ (अक्षय कुमार) से शुरू होती है। उसको भूत-प्रेत पर यकीन नहीं है। वह अपनी पत्नी रश्मि (कियारा) के साथ बेहद खुश है, लेकिन इस शादी से रश्मि के परिवार वाले खुश नहीं हैं। वह हिन्दू मुस्लिम वाले मसले पर ही कायम हैं। कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब आसिफ को रश्मि के मम्मी पापा को मनाना पड़ता है, तभी वह उसके घर जाता है, लेकिन वहां उसके शरीर में ट्रांसजेंडर लक्ष्मी की आत्मा का प्रवेश होता है। इसके बाद एक के बाद एक हत्याएं होती रहती हैं, ऐसा लक्ष्मी के साथ क्या हुआ था, जिसकी वजह से आसिफ के शरीर में वह प्रवेश करती हैं। यह फिल्म का सार है और यहीं फिल्म का राज भी है। लेकिन स्क्रीन प्ले इस कदर लचर है कि आगे क्या होना है, पहले से पता होता है। जबरदस्ती का ड्रामा है। कुछ दृश्य अच्छे हैं, लेकिन फिल्म खास डरावनी नहीं है। कंचना 2011 की साउथ इंडियन हिट फिल्म है। इसलिए तब से अबतक बहुत कुछ बदल भी चुका है। वर्तमान परिपेक्ष्य में कहानी उलझी लगती है। हॉरर और कॉमेडी का मिश्रण करने के चक्कर में दोनों के साथ पूरी तरह से न्याय नहीं हो पाया है।

 

रिव्यू: अगर आपने राघव लॉरेंस की तमिल फिल्म 'कंचना' देखी है तो कहानी तो वही है लेकिन ट्रीटमेंट थोड़ा नया है। पहला सीन जोरदार है और अक्षय कुमार की एंट्री धमाकेदार है। अक्षय कुमार की परफॉर्मेंस में कोई कमी नहीं है लेकिन जब आपको लगता है कि फिल्म तेजी से आगे बढ़नी चाहिए तब उसके नाटकीय सीन पूरा पेस खत्म कर देते हैं। इतना जरूर है कि फिल्म में लक्ष्मी की एंट्री धमाकेदार है और अक्षय कुमार ने जो अपने किरदार को जिया है, वह तारीफ के काबिल है। एक लंबे समय बाद अक्षय ने कॉमिडी के रहते हुए भी सीरियस किरदार को उसके अंजाम तक पहुंचाया है। लक्ष्मी के किरदार में शरद केलकर का किरदार बहुत छोटा है मगर छाप छोड़कर जाता है। अगर आपको हॉरर फिल्मों से डर लगता है तो इस फिल्म को देख लें क्योंकि यह हॉरर फिल्म नहीं है बल्कि एक अच्छा संदेश देती है।

 


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